नागालैंड पुलिस एवं अन्य इंटेलिजेन्स इनपुट के आधार पर ए0टी0एम0 मशीन मे छेड़छाड़ कर बैकों से धोखाधड़ी कर पैसा निकालने वाले अन्तर्राज्यीय गैग का पर्दाफाश
02 अभियुक्त गिरफ्तार, 13 एटीएम कार्ड, 01 कूटरचित पहचान पत्र, 01 आधार कार्ड, 25 हजार रुपये नगद बरामद
गोंडा क्राइम ब्यूरो। नागालैंड पुलिस व अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा सूचना प्राप्त हुई थी कि कई राज्यों में एटीएम मशीनों में छेड़छाड़ कर बैंकों से धोखाधड़ी कर पैसा निकालने वाले अन्तर्राज्यीय गैग गोण्डा जनपद में सक्रिय है। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक गोण्डा संतोष कुमार मिश्रा ने समस्त प्रभारी निरीक्षक/ थानाध्यक्षों व एसओजी/सर्विलांस टीम को इस गैग के बारे में तत्काल जानकारी कर उनकी गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए थे। जिसके तहत थाना परसपुर पुलिस व एसओजी/सर्विलांस टीम को बड़ी सफलता मिली है।
थाना परसपुर पुलिस व एसओजी/सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ कर बैकों से धोखाधड़ी कर पैसा निकालने वाले 02 अन्तर्राज्यीय शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से विभिन्न बैंको के 13 एटीएम कार्ड, 01 कूटरचित पहचान पत्र, 01 आधार कार्ड, विभिन्न जालसाजी घटनाओं से प्राप्त 25 हजार रुपये नगद बरामद हुए। पकड़े गए इन जालसाजों द्वारा जनपद गोण्डा के अलावा भी लखनऊ तथा अन्य राज्यों कलकत्ता (बंगाल), असम, नागालैण्ड आदि स्थानों पर अपने अन्य साथियो के साथ मिलकर एटीएम मशीन मे छेड़छाड़ कर विभिन्न बैको के साथ धोखाधड़ी कर लाखों रुपया निकालने की घटनाओं को अंजाम दिया है। अभियुक्तगणों का एक साथी विक्की उर्फ ज्ञानेन्द्र सिंह को दीमापुर (नागालैंड) पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया गया है।
अपराध करने का तरीकाः-
कड़ाई से पूछताछ करने पर अभियुक्तों ने बताया कि हम लोग फर्जी दस्तावेजो के माध्यम से विभिन्न बैकों मे अपने तथा अपने साथियो के खाते खुलवाकर संबंधित बैक का एटीएम प्राप्त कर फिर उस खाते में कुछ पैसा जमा करा देते थे। फिर उसी पैसे को निकालने के दौरान एटीएम मशीन में निकासी वाले स्थान पर अंगुली लगाकर स्लाइड को होल्ड कर देते है। जिससे पैसा तो तत्काल निकल आता है परन्तु संबंधित बैंक को रिवर्स ट्रांसिक्शन का मैसेज पहुँच जाता है। जिसका फायदा उठाकर हम लोग संबंधित बैकों में शिकायत दर्ज कराकर पुनः पैसा प्राप्त कर लेते थे। इस जालसाजी में इस्तेमाल किए जाने वाले एटीएम कार्ड पीएनबी बैंक मिनी शाखा दुरौनी में काम करने वाले सह-अभियुक्त प्रिंस यादव के द्वारा उपलब्ध कराये जाते थे।