पालिका की साख बचाने को अब मॉनसून के आगमन के पश्चात शुरू हुआ नाला सफाई अभियान
प्रशासन के आदेशानुसार सूक्ष्म कार्य योजना बनाकर 10 जून तक संपन्न होना था नाला सफाई कार्य
दैनिक पवन वेग। गोंडा ब्यूरो सुधाकर कुमार। नगर पालिका परिषद गोंडा की साफ सफाई व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया समेत तमाम अखबारों में खबरें छपने और खूब सारा हो हल्ला मच चुकने के बाद आखिरकार नगर पालिका अध्यक्षा की नींद टूटी और उन्होंने खुद सभी वार्डों में जाकर निरीक्षण करने की जहमत की। एक तरफ जहां यह हल्ला मचा हुआ था कि 16 लाख रुपए नाले की सफाई के लिए आवंटित किए गए थे लेकिन उसके सापेक्ष नाले की सफाई का अभियान नहीं चलाया गया इससे नगरपालिका की किरकिरी तो हो ही गई और अब इतना हो-हल्ला होने के बाद नगर पालिका परिषद गोंडा ने नालों की सफाई का काम अंततः शुरू कराया। यहां आपको यह भी जानना आवश्यक है कि सरकारी आदेशों के अनुसार समस्त छोटे नालों की सफाई का कार्य 31 मई तक और बड़े नालों की सफाई का कार्य 10 जून से पहले हो जाना चाहिए था इस आदेश के सापेक्ष अब जबकि 10-11 जून को मानसून ने जनपद में दस्तक दे दी और बारिश शुरू हो गई उसके बाद नगर पालिका अध्यक्षा की नींद टूटी और उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को काम पर लगाते हुए नाला सफाई के कार्य को शुरू कराया।
अब यहां पर बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि 10 जून के पहले सभी नालों की सफाई का आदेश था तो मानसून के पहले यह साफ सफाई अभियान क्यों नहीं चलाया गया और अब बारिश के मौसम में जब जगह-जगह जलभराव होने लगा है तो क्या नगरपालिका की बची हुई साख को बचाने के लिए आनन-फानन में नाला सफाई का आदेश जारी कर यह सफाई अभियान चलाया जा रहा है? हालांकि नगर पालिका अध्यक्षा ने जिन जिन वार्डों में जाकर निरीक्षण किया वहां पर उनके मुताबिक समस्त कार्य संतोषजनक पाए गए हैं लेकिन हकीकत क्या है या तो उन वादों में रहने वाले लोग ही बेहतर जानते हैं और वही लोग बेहतर बता सकते हैं इतना जरूर कहेंगे कि कुछ वार्डों की स्थिति वास्तव में ड्रेनेज सिस्टम के आधार पर बेहतर है लेकिन वहीं दूसरी तरफ कुछ वार्डों की स्थिति बद से बदतर भी है जहां पर हल्की सी बारिश में भी नालियों का पानी लोगों के घरों में भर जाता है लेकिन शायद नगर पालिका अध्यक्षा को इस बात की जानकारी नहीं दी गई और उन्होंने वार्डों का निरीक्षण कर उनमे सब कुछ अच्छा और संतोषजनक है का तमगा लगा दिया।