कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद ने थामा भाजपा का दामन, पश्चिम बंगाल में असलफता या पार्टी आलाकमान से नाराजगी?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद ने आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में जितिन प्रसाद ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इससे पहले जितिन प्रसाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
हालांकि जितिन प्रसाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही कांग्रेस छोड़ने वाले थे, लेकिन उस वक्त पार्टी हाईकमान ने उन्हें मना लिया था। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश के लखीमपुर क्षेत्र से आते हैं। प्रदेश में 11 फीसदी ब्राह्मण वोटर हैं। ब्राह्मण वोटरों को लुभाने के लिए पिछले कुछ समय से जितिन प्रसाद ब्राह्मण चेतना कैंप भी चला रहे हैं। सूबे में सवर्ण वोटरों पर भाजपा की पहले से ही नजर है। ऐसे में जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। 
जितिन प्रसाद को चंद दिनों पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन जितिन प्रसाद वहां भी कोई करिश्मा नहीं दिखा सके। उनके नेतृत्व में पार्टी की सीटें न केवल शून्य हो गईं, कांग्रेस के वोट प्रतिशत में भी लगभग 10 फीसदी की रिकॉर्ड कमी हुई थी। छह दिनों पहले जी-23 के नेताओं का पत्र मीडिया की सुर्खियां बन गया था। कांग्रेस के शीर्ष 23 नेताओं ने पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में चुनाव कराए जाने की मांग की थी। इन नेताओं में भी जितिन प्रसाद शामिल थे और इस पत्र पर उन्होंने भी हस्ताक्षर किया था। यानी कांग्रेस आलाकमान से उनकी नाराजगी पहले से सामने आ रही थी।

जितिन प्रसाद का राजनीतिक सफर:

जितिन प्रसाद ने दिल्ली विश्विद्यालय से बीकॉम किया है जिसके बाद उन्होंने एमबीए भी किया।
सबसे पहले जितिन ने 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव पद की जिम्मेदारी संभाली। 2004 के लोकसभा चुनाव में वो अपनी पारंपरिक सीट शाहजहांपुर से चुनाव लड़े और जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2008 में जितिन को केंद्रीय राज्य इस्पात मंत्री बनाया गया। 
2009 के लोकसभा चुनाव में जितिन प्रसाद, धौरहरा सीट से लड़े और करीब दो लाख वोटों से जीत हासिल की। 2009 से 2011 तक वो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे। 2011-12 में उन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। 2012-14 तक जितिन, मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री भी रहे। 
जितिन प्रसाद के पिता जितेन्द्र प्रसाद, कांग्रेस के पुराने नेता रहे हैं। एक जमाने में जितेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार रह चुके हैं। जितेंद्र कांग्रेस पार्टी में उपाध्यक्ष पद पर भी रहे हैं। 

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