कैसे थमेगी कोरोना की रफ्तार बाहर से आने वाली बसों पर नहीं है नियंत्रण,प्रशासन रहता बेखबर

गोंडा। क्राइम ब्यूरो। एक तरफ जनपद में प्रतिदिन जहां 100 से ऊपर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है लेकिन प्रशासन का पूरा ध्यान तो पहले चुनाव और फिर उसके बाद मतगणना में लगा रहा और उसके बाद शायद इस समय लॉकडाउन पर लगा हुआ है लेकिन फिर भी लॉक डाउन का सही प्रकार से पालन कराने में प्रशासन असफल रहा। संलग्न तस्वीर शुक्रवार दोपहर 12:00 बजे के आसपास की है जब गुजरात से आई हुई एक बस स्थानीय लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज चौराहे से थोड़ा आगे बढ़कर तिवारी निकेतन के सामने खड़ी थी हमारी नजर पड़ी हमने रुककर ड्राइवर से पूछा कि बस कहां से लेकर आए हो तो जवाब मिला राजकोट से। पूरी बस यात्रियों से भरी हुई थी सभी यात्री एक-एक कर उसमें से उतरे ज्यादातर यात्री उसमें से हाफ पैंट और बनियान पहने हुए थे इक्का-दुक्का के चेहरे पर ही मास्क दिखाई पड़ रहा था यह सभी यात्री गोंडा में उतरे और पीछे के रास्ते से पैदल चलते हुए बस अड्डे तक गए जहां से बस पकड़ कर अपने अपने गंतव्य को रवाना हुए होंगे। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन का इस समय पूरा ध्यान चुनाव पर ही था क्या कोरोना को रोकने के लिए उठाए गए सारे प्रभावी कदम बेबुनियाद हैं? जब बाहर से आने वाली बसों की कोई जांच ही नहीं हो रही है तो कैसे रुकेगा कोरोना? बाहर से कौन सी बस आ रही है किस राज्य से आ रही है कितने यात्रियों को लेकर आ रही है और उन यात्रियों की कोरोना की आर टी पी सी आर या एंटीजन जांच हुई है या नहीं हुई है या वह ऐसे ही चले आ रहे हैं इस बात पर प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी सुध लेने को तैयार नहीं लेकिन जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है कि उसने कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण पा लिया है।

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