15 वर्ष की उम्र मे ऐसा जज्बा कि बड़े भी दांतों तले दबा लेते है उंगलियाँ
गोंडा। संलग्न तस्वीर है झंझरी क्षेत्र के गांव दसियापुर के निवासी शिवांश तिवारी की। इनकी उम्र महज 15 वर्ष है लेकिन इनके कार्य के बारे में सुनकर आपको अपना कार्य छोटा लगने लगेगा। शिवांश अभी 11वीं के छात्र हैं और करीब 2 बीघे खेत में स्वयं सब्जी बोते हैं। वर्तमान में इन्होंने भिंडी, मूली, लौकी, तोरी, धनिया आदि फसलें बो रखा है। ये सुबह 3 बजे उठते हैं और शाम को तोड़कर रखी गई करीब 50 किग्रा से अधिक सब्जी को साईकिल पर लादकर ये 15 किमी दूर सब्जी मंडी में जाकर अपनी सब्जी को बेंचते हैं और फिर वहां से लगभग 11 बजे वापस 15 किमी साईकिल चलाकर अपने घर पहुंचते हैं और फिर नहा-धो कर भोजन व थोड़ा आराम करते हैं और उसके बाद फिर अपने खेतों में जाकर मेहनत करके पौधों की खराब पत्तियां आदि काटकर अलग करते हैं ताकि पौधे और सब्जी को कीड़ों से बचा सकें और कीटनाशक न डालना पड़े। इसके बाद खेत में अन्य काम करने के बाद वे अपनी किताबें खोलकर पढ़ते हैं और फिर शाम होते ही अपने घर पर व कुछ दूर सड़क पर कुल करीब 30 गरीब बच्चों को 1-1 घंटे निःशुल्क पढ़ाते हैं। उसके बाद वे अपने खेत में सब्जियां तोड़कर अगले दिन के लिए रखते हैं और फिर भोजन करके सो जाते हैं। इस प्रकार दिन में 18 घंटे से अधिक काम करके शिवांश न सिर्फ अपने घर का पूरा खर्च उठाते हैं बल्कि अपनी पढ़ाई और गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इनकी इस कहानी को सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ सकते हैं। हम सभी को शिवांश से कड़ी मेहनत, जिम्मेदारी और संतोष की सीख लेना चाहिए। शिवांश बड़े होकर कृषि विज्ञान में पढ़ाई करके एक उन्नत किसान बनना चाहते हैं। समस्त जनपद वासियों को शिवांश पर गर्व है।