कैसे थमेगी कोरोना की रफ्तार जब बैंकों में पुलिस की निष्क्रियता से नहीं हो रहा दैहिक दूरी का पालन,क्या सिर्फ स्कूल कॉलेज बंद करने और साप्ताहिक लॉकडाउन से रुकेगा कोरोना?



गोंडा। गोंडा जनपद में शुक्रवार को जारी कोरोना बुलेटिन के अनुसार 328 नए पॉजिटिव मरीज पाए गए अब तक कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1134 पहुंच चुकी है कोरोना की रफ्तार के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में शनिवार रात 9:00 बजे से सोमवार सुबह 6:00 बजे तक का कोरोना कर्फ़्यू भी लगाया गया है। एक तरफ त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और दूसरी तरफ कोरोना की बढ़ती रफ़्तार के मद्देनज़र प्रशासन ने अपनी औपचारिकता पूरी की जिसमें गोंडा जनपद में भी पुलिस अधीक्षक के नेत्रत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया। जहाँ एक ओर प्रशासन कोरोना महामारी के चलते नाइट कर्फ्यू और सप्ताहिक बंदी के जरिये लोगों को भीड़-भाड वाले जगह पर जाने से रोकने और सामाजिक दूरी बनाए रखने का पाठ पढा रहा है वहीं आज शाम को हुये फ्लैगमार्च मे पैरामिलेट्री फोर्स और पुलिस फोर्स द्वारा गुरुनानक चौराहे पर एक दूसरे से सटे रहने के चलते न सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उडाई गई बल्कि जनता मे ये संदेश गया कि क्या आम जनता को ही जागरूक होने की जरूरत है। कुछ ऐसा ही नजारा भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में देखने को मिला जहां पर अभी दो-तीन दिन पहले ही भारतीय स्टेट बैंक के दो कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे उसके बाद बैंक को 2 दिन के लिए बंद किया गया साथ ही साथ 2 दिन तक लगातार सैनिटाइजेशन का काम किया गया लेकिन अगले ही दिन बैंक खुलने के साथ ही बैंकों में इतनी भीड़ हो गई कि लोग एक दूसरे से सटे हुए खड़े दिखाई पड़े। जब अंदर हमारी टीम तहकीकात करने पहुंचती है तो पता चलता है कि पुलिस वाले आराम से बैठकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और केवल मास्क लगाने के लिए लोगों से बार-बार कहा जा रहा है लेकिन पुलिस वालों से अपनी कुर्सी छोड़ी नहीं जा रही है हमारी तहकीकात टीम जब दूसरे प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक पर पहुंचती है तो वहां भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है एचडीएफसी बैंक के ठीक सामने पुलिस की गाड़ी खड़ी होती है जहां पर पुलिस वाले केवल पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को सही करवाने का ठेका लिए हुए हैं अगर किसी की गाड़ी गलती से गलत खड़ी हो जाती है तो उसको तुरंत हड़काया जाता है लेकिन वही बैंक के ऊपर सीढ़ी पर चढ़कर जिस प्रकार की भीड़ देखने को मिली जहां पर कुछ लोग बिना मास्क के भी दिखाई पड़े और एक दूसरे से सटे हुए खड़े रहे जहां पर सोशल डिस्टेंसिंग की पूरी तरीके से धज्जियां उड़ाते हुए दिखे उस पर पुलिस वालों ने कुछ भी करना उचित नहीं समझा। इस बारे मे जब संवाददाता ने पुलिस से पूछा की इतनी भीड़ क्यों है तो जवाब मिला की जाकर मैनेजर से पूछो। जागरूकता का पाठ पढाने वाले चाहे नियम पालन करे या नहीं, उन्हें कोई कुछ कहने वाला नहीं है। यदि ऐसा ही रहा तो कोरोना से जंग कैसे जीती जाएगी। क्या सिर्फ स्कूल कॉलेज बंद करने से कोरोना की रफ़्तार रोकी जा सकती है?