गोंडा। स्वास्थ्य विभाग ‘अंधा’, झोलाछाप कर रहे मौत का धंधा, जिम्मेदार कौन?
गोंडा:। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते झोलाछाप लोगों को स्वस्थ करने के बजाय उनको मौत के मुंह में ढकेल रहे हैं। इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। ताजा मामला तरबगंज का ही है, यहां पास के एक गांव में किशोरी की मौत झोलाछाप के इलाज के कारण ही हुई। शहर के बाहरी इलाकों और देहात में झोलाछापों ने खुद को डॉक्टर घोषित कर रखा है। इनमें से कुछ बिना डिग्री के डॉक्टर हैं तो कुछ अवैध डिग्रियों वाले। यह कथित डॉक्टर हर मर्ज के इलाज की गारंटी लेते हैं और जब केस बिगड़ जाता है तो फिर हाथ खड़े कर देते हैं। कुछ मरीज इन झोलाछापों के इलाज से मौत के मुंह में समा चुके हैं तो कुछ की हालत बिगड़ चुकी है। कई बार जमकर हंगामा भी हुआ है। इन झोलाछापों पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते अंकुश नहीं लग पा रहा।
झोलाछापों के खिलाफ बने हैं सख्त कानून
झोलाछापों के खिलाफ सख्त नियम कानून हैं।
क्या है कानून-
यदि अप्रशिक्षित और अप्राधिकृत व्यक्ति किसी मरीज का इलाज करे तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 419, 420 के अलावा इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धारा 15(3) के तहत कड़े दंड का प्रावधान है
इस एक्ट में दो साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा यदि उसकी डिग्री फर्जी हैं तो उसके खिलाफ धारा 468, 471 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है।