पी एफ घोटाला- न जाने कहां खो गई जांच, किस किस पर आएगी आंच
गोंडा। जिला संवाददाता मुशीर खान। नगर पालिका में पीएफ घोटाला इन दिनों शहर में चर्चा का विषय है सभी के जेहन में एक ही बात घूम रही है कि कैसे एक पालिका लिपिक के द्वारा 4 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। घोटाले के उजागर होने के बाद से एफ आई आर की तैयारी ही हो रही है जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई और एफ आई आर के आदेश दिए गए। पीएफ घोटाले में निलंबित किए गए विपिन कुमार की जांच के लिए अधिशाषी अधिकारी विकास सेन ने अवर अभियंता जलकल अर्चना के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया कमेटी में अवर अभियंता के अलावा सफाई निरीक्षक नुरुश सहर व लिपिक राहुल आनंद श्रीवास्तव को शामिल किया गया, ई ओ ने 15 दिन के भीतर निलंबित लिपिक के क्रियाकलाप की जांच रिपोर्ट मांगी है इसके साथ ही नगर कोतवाली को मामले की एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है पुलिस ने अभी तक एफ आई आर दर्ज नहीं कि मामले की जांच कर रही है पहला मामला है जब पुलिस तहरीर मिलने में जांच के बहाने मामले को लटकाए हुए हैं। वैसे नगर पालिका गोंडा में यह कोई पहला मामला नहीं है भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी विकास सेन ने आनन-फानन में एक कर्मचारी को बलि का बकरा बनाते हुए निलंबित कर दिया बल्कि इस कार्यवाही से मामले को छिपाने में जुटे सफाई कर्मी संतोष जायसवाल को लिपिक बनाकर पी एफ के पटल का प्रभार सौंपा। शिकायतकर्ता विनोद का आरोप है कि मामले में लीपापोती की जा रही है शिकायतकर्ता विनोद कुमार श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की जांच कराए जाने व कर्मियों के पीएफ का पैसा वापस दिलाए जाने की मांग की है नगर पालिका परिषद कर्मचारी विनोद कुमार ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि वर्ष 2015 में जिले के अपर जिलाधिकारी को नगर पालिका परिषद का प्रशासक बनाया गया था उसी दौरान उन्होंने तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक राकेश कुमार श्रीवास्तव से मिलीभगत कर आठवीं पास सुपरवाइजर मुश्फिक को भविष्य निधि पटल का प्रभार सौंप दिया इसके बाद आरोप है कि तीनों ने बैंक कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी बिल वाउचर भरकर करोड़ों रुपए निकाल लिए । पी एफ की धनराशि में हेराफेरी लगातार जारी रही और कर्मचारियों की मेहनत की गाढ़ी कमाई का हिस्सा निधि खातों में भेजा जाता है आरोप यह भी है कि ई ओ विकास सेन से मिलीभगत कर पालिका अध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 50 लाख रुपए निकाल लिए ।
विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बैंक शाखा प्रबंधक से पीएफ खाते से पैसा निकाले जाने की शिकायत की तो नगरपालिका में हड़कंप मच गया लगभग चार करोड़ का घोटाला सामने आया जिसमें नगर पालिका के अधिकारी विकास सेन खुद फंसते नजर आए और उन्होंने अपनी गर्दन बचाने के लिए बगैर किसी जांच के विपिन नाम के कर्मचारी को पीएफ घोटाले का दोषी मानते हुए उसे निलंबित कर दिया जबकि इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी मुश्फिक पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। गोंडा पुलिस नगर कोतवाली की भी कार्यशैली इसमें संदेह में आ रही है जांच करने के बहाने नगर कोतवाली पुलिस तहरीर दबाए बैठी है इस संबंध में जब नगर कोतवाल आलोक राव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें कोई तहरीर नहीं मिली है जबकि अधिशासी अधिकारी विकास सेन का कहना है कि उन्होंने तहरीर दे दी है अब मामला यहां पर यह है कि कौन सच्चा और कौन झूठा देखना यह है कि जांच की आंच कहां तक जाएगी और कौन-कौन इसकी जद में आएगा।